सुप्रीम कोर्ट से विनय चौबे को मिली जमानत

हजारीबाग वन भूमि मामले में नवंबर 2025 से जेल में बंद IAS अधिकारी विनय चौबे को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका मंजूर करते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दिया है। चौबे ने झारखंड हाईकोर्ट से जमानत न मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट का सहारा लिया था।

सुनवाई के दौरान चौबे के वकील ने बताया कि वह नवंबर 2025 से जेल में हैं। इस मामले में अन्य आरोपी विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह को भी जमानत मिल चुकी है। राज्य सरकार ने चौबे की जमानत का विरोध किया, यह कहते हुए कि वह एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और अन्य मामलों में भी उनकी संलिप्तता है। सरकार को भय है कि यदि चौबे जेल से बाहर आते हैं, तो वह मामले से जुड़े लोगों पर दबाव डाल सकते हैं।

सुनवाई के दौरान एक सवाल का सही उत्तर नहीं दिया जा सका, जिस पर अदालत ने टिप्पणी की कि अभियुक्त के वकील को तथ्यों की सही जानकारी नहीं है। सभी पक्षों की बात सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने चौबे को जमानत देने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि यदि चौबे निचली अदालत की जमानत शर्तों का उल्लंघन करते हैं, तो राज्य सरकार जमानत रद्द कराने के लिए फिर से अदालत का रुख कर सकती है।

जांच का इतिहास और FIR का दर्ज होना

यह मामला हजारीबाग में वन भूमि के गलत तरीके से म्यूटेशन और जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी से संबंधित है। एसीबी ने अगस्त 2015 में इस मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की थी और इसके लगभग 10 साल बाद, यानी 2025 में नियमित FIR दर्ज की गई।

इस मामले में नेक्सजेन के मालिक विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह भी शामिल हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने दबाव के माध्यम से वन भूमि का म्यूटेशन कराया। जांच में ब्रह्मास्त्रा एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड का भी जिक्र आया है, जहां आरोप है कि 2010 से 2015 के बीच 3.16 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए। स्निग्धा सिंह इस कंपनी की निदेशक हैं।

एसीबी द्वारा FIR दर्ज करने के बाद विनय चौबे को नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दी है।

विनय चौबे पर मामले और आरोप

1. शराब घोटाला मामला

क्या आरोप था: झारखंड की नई शराब नीति में अनियमितता और प्लेसमेंट एजेंसियों के चयन में पद का दुरुपयोग। जांच के अनुसार, इससे सरकारी खजाने को लगभग 38 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
क्या हुआ: ACB ने मई 2025 में विनय चौबे को गिरफ्तार किया।
जमानत: बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई।

2. हजारीबाग वन भूमि घोटाला

क्या आरोप था: सरकारी और वन भूमि के रिकॉर्ड में हेरफेर, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन का म्यूटेशन और सरकारी जमीन को निजी व्यक्तियों को हस्तांतरित करने की साजिश।
क्या हुआ: इस मामले में ACB ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। हाईकोर्ट में कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं।
जमानत: इस मामले में जमानत पर कोर्ट की कार्यवाही जारी रही और हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। अंततः सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 31 जुलाई 2026 को जमानत दी।

3. हजारीबाग खासमहल जमीन मामला

क्या आरोप था: करीब 2.75 एकड़ खासमहल जमीन के अवैध हस्तांतरण और म्यूटेशन में अनियमितता।
क्या हुआ: मामले में विनय चौबे समेत अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच की गई।

4. आय से अधिक संपत्ति का मामला

क्या आरोप था: ACB ने आरोप लगाया कि विनय चौबे की ज्ञात आय की तुलना में उनकी संपत्ति और वित्तीय लेनदेन अधिक हैं। जांच में परिवार से जुड़े लोगों के बैंक खातों की भी पड़ताल की गई।
क्या हुआ: ACB ने नवंबर 2025 में इस मामले में अलग FIR दर्ज की।
जमानत: यह मामला बाद में दर्ज हुआ और इसकी जांच अलग से चल रही है।