जामताड़ा में भाजपा का बड़ा प्रदर्शन, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
जामताड़ा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और प्रशासनिक नाकामी के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जिला इकाई ने शुक्रवार को एक दिवसीय विशाल धरना एवं ‘हल्ला बोल’ कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम गर्भवती रीना रवानी और उनके अजन्मे बच्चे की मृत्यु के मामले में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के इस्तीफे, पीड़ित परिवार को मुआवजा और भाजपा कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग को लेकर किया गया। हजारों कार्यकर्ता इस प्रदर्शन में शामिल हुए और शक्ति प्रदर्शन किया। धरने की शुरुआत जामताड़ा डाक बंगला/परिषद परिसर से एक विशाल रैली के साथ हुई, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होकर समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) पहुंची। यहां, धरना स्थल पर कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
स्वास्थ्य मंत्री पर निशाना साधते हुए बाबूलाल मरांडी
धरने को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जामताड़ा सदर अस्पताल में घटी घटना अत्यंत दुःखद है। उन्होंने यह भी कहा कि “अगर स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में ऐसी घटनाएं हो रही हैं, तो पूरे झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाना सरल है।” मरांडी ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि सरकारी अस्पतालों से मरीजों को निजी नर्सिंग होम में भेजा जाता है और भाजपा कार्यकर्ताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि भाजपा कार्यकर्ता अन्याय के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे।
सीता सोरेन की टिप्पणी: जामताड़ा अस्पताल में बढ़ता संकट
पूर्व विधायक सीता सोरेन ने राज्य सरकार की विफलताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि जामताड़ा सदर अस्पताल आम लोगों के लिए “मौत का घर” बनता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एंबुलेंस की कमी और डॉक्टरों की लापरवाही के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। सोरेन ने कहा कि झारखंड में जल, जंगल, जमीन और जनहित की रक्षा के लिए फिर से एक ‘हूल’ (क्रांति) की आवश्यकता है।
रणधीर सिंह का बयान: अधिकारी रहें निष्पक्ष
प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व मंत्री रणधीर सिंह ने कहा कि जच्चा-बच्चा की मौत के मामलों में आवाज उठाने वाले नेताओं पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सत्ता का परिवर्तन हमेशा होता है, इसलिए प्रशासन को किसी राजनीतिक दबाव में आकर एकतरफा कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।
भाजपा की प्रमुख मांगें
इस धरना प्रदर्शन के जरिए भाजपा जिला इकाई ने राज्य सरकार के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं: स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को जामताड़ा अस्पताल की घटना और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। मृतका रीना रवानी के परिजनों को ₹50 लाख का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। भाजपा जिलाध्यक्ष सुमित शरण समेत आठ कार्यकर्ताओं पर दर्ज प्राथमिकी का तुरंत वापस लिया जाए। महिला की मौत के मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। जामताड़ा सदर अस्पताल में आवश्यक डॉक्टर, दवाएं, चिकित्सा उपकरण और 24×7 एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराई जाए। बारिश के मौसम में ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
भाजपा के ‘हल्ला बोल’ कार्यक्रम के चलते जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। समाहरणालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में जामताड़ा एसडीपीओ, कई थाना प्रभारियों सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष पुलिस बल की तैनाती की गई थी। इस कार्यक्रम में पूर्व कृषि मंत्री सत्यानंद झा बाटुल, प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील सोरेन, भाजपा नेता मनीष दुबे, माधव चंद्र महतो, तरुण गुप्ता, हरिमोहन मिश्रा और अन्य नेता भी उपस्थित रहे।
