किसलय शानू

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर CID ने 22 जुलाई को मामला दर्ज किया था। अब तक की जांच में 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह लेख इसी जांच की श्रृंखला का छठा और अंतिम हिस्सा है, जिसमें हम जानेंगे कि प्राथमिकी में क्या उल्लेख है और जांच किस प्रकार से आगे बढ़ी है।

मुख्यमंत्री के नाम गुमनाम शिकायत से प्रारंभ हुई जांच

इस पूरे मामले की शुरुआत मुख्यमंत्री के लिए भेजी गई एक गुमनाम शिकायत से हुई थी। शिकायत में JPSC की परीक्षाओं के संचालन में हुई अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ी हुई है, इसलिए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।

सरकार ने CID ADG से रिपोर्ट की मांग की

मुख्यमंत्री को मिली शिकायत के आधार पर राज्य सरकार ने मामले की जांच का निर्णय लिया। गृह विभाग के अवर सचिव दयानंद कुमार ने CID के ADG मनोज कौशिक को पत्र लिखकर जांच कराने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इसके बाद CID ADG ने 21 जुलाई को CID के DSP वेंकटेश कुमार को जांच की जिम्मेदारी दी। DSP ने 24 घंटे के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसके आधार पर 22 जुलाई को CID ने प्राथमिकी दर्ज की।

CID के DSP की रिपोर्ट पर दर्ज हुआ मामला, आठ लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया

CID के DSP वेंकटेश कुमार की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह मामला दर्ज किया गया है। दर्ज प्राथमिकी में TDPL कंपनी के निदेशक सत्यपाल सिंह, रामवीर सिंह, कर्मचारी मोहम्मद उस्मान और अवध, JPSC की परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, और अन्य कर्मचारियों को नामजद आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा JPSC और TDPL के अज्ञात कर्मचारियों को भी आरोपी ठहराया गया है।

प्राथमिकी में CID ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने मिलीभगत कर एक दागी कंपनी को परीक्षा से जुड़े गोपनीय कार्य सौंपे। इसके साथ ही, गोपनीय दस्तावेजों को कार्यालय से बाहर भेजने की भी बात कही गई है। प्राथमिकी में कूटरचना, जालसाजी और अन्य गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।

यह मामला BNS की विभिन्न धाराओं और झारखंड प्रतियोगिता परीक्षा में अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है।