रांची विश्वविद्यालय और DSPM में प्रोफेसरों के प्रमोशन में देरी
झारखंड में रांची विश्वविद्यालय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPM) के अनुसूचित जनजाति (ST) प्रोफेसरों के प्रमोशन में पिछले 10 वर्षों से अनिश्चितता बनी हुई है। यह मामला हाल ही में नेशनल कमीशन फॉर स्टूडेंट्स (NCST) की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा के संज्ञान में आया है। उन्होंने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
प्रमोशन की प्रक्रिया पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, पिछले एक दशक से ST प्रोफेसरों के प्रमोशन की प्रक्रिया ठप पड़ी है, जिसके कारण इन शिक्षकों को कई मौकों पर आर्थिक और पेशेवर हानि का सामना करना पड़ा है। यह मुद्दा न केवल प्रोफेसरों के लिए बल्कि छात्रों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि यह शैक्षणिक माहौल पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
डॉ. आशा लकड़ा की पहल
डॉ. लकड़ा ने इस मामले पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षा में समानता और न्याय सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा की है कि वे शीघ्र ही प्रमोशन की प्रक्रिया को स्पष्ट करें और रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उनकी पहल से उम्मीद की जा रही है कि यह मुद्दा जल्द सुलझ जाएगा।
प्रभावित शिक्षकों की स्थिति
प्रमोशन में देरी से प्रभावित ST प्रोफेसरों ने अपनी निराशा व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह स्थिति उनके करियर को स्थिरता देने में बाधा बना हुआ है। शिक्षकों ने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और अब इस मामले में उचित कार्रवाई की आवश्यकता है।
शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया
शिक्षा विभाग ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, उच्च शिक्षा के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहे हैं और जल्द ही समाधान की दिशा में कदम उठाने की योजना बना रहे हैं।
