झारखंड: पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के खिलाफ कार्रवाई का संदर्भ
झारखंड में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाले पूर्व ईडी अधिकारी राजेश्वर सिंह के ससुर की 24 वर्ष पूर्व हत्या कर दी गई थी। इस मामले की जांच पहले लखनऊ पुलिस द्वारा की गई, उसके बाद सीबीआई ने इसे अपने हाथ में लिया। हाल ही में मामले में दोषियों को सजा सुनाई गई है। राजेश्वर सिंह ने ईडी में अपने कार्यकाल के दौरान मधु कोड़ा और उनके सहयोगियों के खिलाफ कई महत्वपूर्ण कदम उठाए थे। उनकी पत्नी, लक्ष्मी सिंह, वर्तमान में नोएडा की पुलिस कमिश्नर हैं, जबकि सिंह सरोजनीनगर से विधायक हैं।
लक्ष्मी सिंह का 24 वर्षों का संघर्ष
यह मामला लक्ष्मी सिंह और उनके परिवार के लिए महत्वपूर्ण है। यह केवल एक अदालती फैसले की कानूनी कहानी नहीं है, बल्कि यह एक पत्नी के 24 वर्षों के संघर्ष की दास्तान है, जिसमें एक आईपीएस अधिकारी ने अपने पिता को खोने का दर्द झेला। यह मानवीय पहलू सत्ता और कानून के पीछे छिपे आंसुओं को उजागर करता है।
एक भयावह दिन: जब परिवार बिखर गया
यह घटना 8 अगस्त 2002 की है, जब 57 वर्षीय वरिष्ठ वकील इंद्रदेव सिंह अपनी पत्नी नयनतारा और 24 वर्षीय बेटे दिग्विजय के साथ खरीदारी के लिए निकले थे। इंद्रदेव सिंह अपनी बाइक पर आगे बढ़े, जबकि उनकी पत्नी और बेटा दूसरी बाइक से उनके पीछे चल रहे थे।
जैसे ही वे कैसरबाग टेलीफोन एक्सचेंज के निकट पहुंचे, दो बदमाशों ने उन्हें घेर लिया और अचानक फायरिंग कर दी। इंद्रदेव सिंह को गंभीर चोटें आईं और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हत्या ने पूरे लखनऊ में हलचल मचा दी थी।
उस समय, लक्ष्मी सिंह 2000 बैच की एक युवा आईपीएस अधिकारी थीं। पिता की मौत के बाद, उन्होंने अपने परिवार की देखभाल के लिए उत्तर प्रदेश में स्थानांतरण की मांग की, जिसे तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने मंजूर किया।
हत्या का कारण और सीबीआई जांच
इंद्रदेव सिंह की हत्या का कारण एक जमीन का विवाद था। उन्होंने सीतापुर रोड पर एक भूमि खरीदी थी, जिसे बेचने के लिए अपने सहयोगी को जिम्मेदारी दी थी। लेनदेन में गड़बड़ी के बाद विवाद बढ़ गया। सीबीआई ने जांच में पाया कि उनके सहयोगी ने ही शूटरों को पैसे देकर उन्हें मारने की साजिश की थी।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 2002 में इसे सीबीआई को सौंप दिया गया था। 24 वर्षों में 50 गवाहों से पूछताछ की गई। इस लंबी प्रक्रिया के दौरान कई आरोपियों की मौत भी हो गई। हाल ही में, तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
अंतिम फैसला और परिवार की स्थिति
न्यायालय ने विक्रम यादव, पन्ना सिंह और बृजेश यादव को दोषी ठहराया और उम्रकैद के साथ-साथ 1.5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने निर्देश दिया कि जुर्माने की 80 प्रतिशत राशि पीड़ित परिवार को मुआवजे के रूप में दी जाए। इस 24 साल के संघर्ष ने परिवार से बहुत कुछ छीन लिया, लेकिन न्याय की इस लड़ाई ने यह साबित कर दिया कि सच्चाई और कानून की जीत होती है।
