रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि झारखंड प्राइवेट यूनिवर्सिटीज एक्ट, 2024 में संशोधन करने की राज्य सरकार की विधायी शक्ति पर अदालत के अंतरिम आदेश का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि अदालत सामान्यतः विधायिका को कानून बनाने या संशोधन करने से नहीं रोकती, बल्कि कानून बनने के बाद उसकी संवैधानिक वैधता की जांच करती है।

सरला बिरला विश्वविद्यालय सहित विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि 28 जनवरी 2025 का अंतरिम आदेश केवल 11 दिसंबर 2024 की अधिसूचना पर आगे की कार्रवाई तक सीमित था। महाधिवक्ता ने बताया कि प्रस्तावित संशोधन विधेयक पर विधानसभा के मानसून सत्र में विचार संभव है। मामले की अगली सुनवाई दो सितंबर को होगी।

दुमका के पूर्व बीएसओ की जमानत खारिज

झारखंड हाईकोर्ट ने एसीबी द्वारा ₹40,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार दुमका के पूर्व प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (बीएसओ) नंदन कुमार उर्फ अभिषेक गुप्ता की जमानत याचिका खारिज कर दी। जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने कहा कि लोक सेवक के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया लंबित है और मामले की परिस्थितियों में जमानत का कोई आधार नहीं बनता।

प्रार्थी ने आरोपपत्र दाखिल होने और अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने का हवाला दिया था, जबकि एसीबी ने बताया कि स्वीकृति का प्रस्ताव विभाग के पास लंबित है। नंदन कुमार 19 मार्च से न्यायिक हिरासत में है। उस पर ₹50,000 रिश्वत मांगने और ₹40,000 लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने का आरोप है।

दो दोषियों की जमानत पर फैसला सुरक्षित

झारखंड हाईकोर्ट ने सिमडेगा के चर्चित चारहरे हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा पाए पुनीत सोरेंग और निर्मल सोरेंग की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। दोनों ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर आपराधिक अपील लंबित रहने के दौरान जमानत की मांग की है। जुलाई 2025 में ट्रायल कोर्ट ने दोनों को आजीवन कारावास और मुख्य अभियुक्त संजय सोरेंग को फांसी की सजा सुनाई थी। मामला 17 मई 2018 को पाकरटांड़ थाना क्षेत्र में जमीन विवाद के दौरान चार लोगों की टांगी से हत्या से जुड़ा है।

त्रुटि सुधारने को हाईकोर्ट में जनहित याचिका

भुइहर समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने की प्रक्रिया में हुई कथित लिपिकीय त्रुटि को छह वर्षों से नहीं सुधारे जाने के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। भुइहर ट्राइब राइट्स होल्डर्स कमेटी की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि यदि समय रहते इस त्रुटि का संशोधन नहीं किया गया तो भविष्य में हजारों लोगों को अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में कानूनी और प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। याचिका में बताया गया है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2020 में भुइहर समुदाय को एसटी सूची में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की थी।