झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में धांधली एवं अनियमितताओं के आरोपों के चलते सत्ताधारी हेमंत सोरेन सरकार पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखा हमला किया है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के माध्यम से राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि परीक्षा के नाम पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
रघुवर दास ने उठाए कई गंभीर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 14वीं JPSC पीटी परीक्षा सहित अन्य हालिया प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली की CBI जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि JPSC ने महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी एक ऐसी एजेंसी को सौंपी, जिसे उत्तर प्रदेश में ब्लैकलिस्ट किया गया था और 2025 में इसे JSSC द्वारा भी ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।
रघुवर दास ने सवाल उठाया कि जब अन्य राज्यों में पेपर लीक के मामले पर विपक्षी दल आंदोलन करते हैं, तो झारखंड के युवाओं पर हो रहे अत्याचार पर राहुल गांधी, कांग्रेस और JMM चुप क्यों हैं?
उन्होंने 19 जुलाई को आयोजित क्षेत्रीय कार्यकर्ता परीक्षा की चर्चा करते हुए कहा कि अभ्यर्थियों को परीक्षा के बाद एडमिट कार्ड के लिंक मिले और संथाली भाषा के प्रश्नपत्र में 40 से अधिक सवाल पाठ्यक्रम से बाहर थे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उत्पाद सिपाही भर्ती में अव्यवस्था के कारण 12 अभ्यर्थियों की मृत्यु का उल्लेख भी किया।
बाबूलाल मरांडी ने लगाए संगीन आरोप
BJP के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि परीक्षाओं में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन के जरिए नौकरियों की बिक्री का एक संगठित खेल चल रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल अनियमितता नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य और प्रशासनिक व्यवस्था पर हमला है।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले विनोद सिंह के पास कई अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड मिले हैं और पूछा कि इसकी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
मरांडी ने CID और ACB की जांच पर संदेह जताते हुए कहा कि कार्रवाई केवल निचले स्तर के लोगों तक सीमित है और बड़े अधिकारियों को बचाया जा रहा है।
उन्होंने यह भी आशंका व्यक्त की कि CID द्वारा जब्त किए गए डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट या निष्प्रभावी करने का प्रयास किया जा सकता है।
मुख्य मांगे
1. 14वीं JPSC पीटी और अन्य पिछली प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई धांधली की निष्पक्ष CBI जांच हो।
2. जांच का दायरा प्रश्नपत्र निर्माण, अधिकारियों, बिचौलियों और वित्तीय लेनदेन तक विस्तारित किया जाए।
3. CID की छापेमारी में बरामद सामानों की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
भाजपा नेताओं ने कहा कि वर्षों से मेहनत कर रहे बेरोजगार युवाओं की योग्यता को भ्रष्टाचार के माध्यम से प्रभावित करना उनके अधिकारों के साथ विश्वासघात है। सरकार को तुरंत पारदर्शी जांच सुनिश्चित कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
