जामताड़ा में निर्माण कार्य पर ग्रामीणों का असंतोष
जामताड़ा प्रखंड के अमलाचातर गांव में निर्माणाधीन नाली के बह जाने से स्थानीय निवासियों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है। बताया गया है कि 10 जुलाई को नाली की ढलाई की गई थी, लेकिन रात में हुई बारिश के कारण नाली के नीचे की मिट्टी बह गई। नाली की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने शनिवार को विरोध प्रदर्शन किया और निर्माण कार्य को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
निर्माण कार्य में सूचना की कमी
गांव में चल रहे इस निर्माण कार्य के संबंध में कोई सरकारी सूचना बोर्ड या पट्टिका नहीं लगाई गई है, जिससे ग्रामीणों को योजना की लागत और विभाग के बारे में स्पष्ट जानकारी प्राप्त नहीं हो रही है। हालांकि, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्य लोक निर्माण विभाग (PWD) के अंतर्गत किया जा रहा है। इस परियोजना का आरंभ मिहिजाम के शहीद निर्मल महतो चौक से होकर अमलाचातर, गोपालपुर और कोलाडाबर तक सड़क और नाली निर्माण से संबंधित है। अमलाचातर गांव में लगभग आधा किलोमीटर लंबी नाली का निर्माण किया जा रहा है।
निर्माण में अनियमितताएं
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ठेकेदार और संबंधित कनीय अभियंता ने निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएं बरती हैं। ग्रामीणों ने बताया कि ढलाई के मिश्रण में सीमेंट की मात्रा निर्धारित मानकों से काफी कम है। नियमों के अनुसार, नाली निर्माण से पहले ईंटों के माध्यम से सोलिंग की जानी चाहिए थी, लेकिन आधा किलोमीटर के क्षेत्र में कहीं भी ऐसा नहीं किया गया। सीधे मिट्टी पर ही ढलाई की गई, जबकि नाली का बेस 4 इंच मोटा होना चाहिए था, लेकिन केवल 1 से 2 इंच की पतली परत डाली गई है।
नए निर्माण की मांग
एक दिन पहले हुई ढलाई के बाद, मिट्टी के खिसक जाने से नाली के नीचे खाली स्थान दिखाई दे रहा है, जिससे धंसने का खतरा उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे इस तरह की लापरवाही को सहन नहीं करेंगे। उन्होंने मांग की है कि इस घटिया निर्माण को पूरी तरह से तोड़कर मानकों के अनुसार एक मजबूत नाली का निर्माण किया जाए। इसके साथ ही, दोषी ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। जब तक प्रशासन इस मुद्दे पर ध्यान नहीं देता, तब तक कार्य को फिर से शुरू नहीं होने दिया जाएगा।
