झारखंड में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा

हाल ही में गैस बिल, ट्रैफिक चालान और सरकारी नोटिस के नाम पर भेजी गई एक APK फाइल ने हजारों लोगों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है। मुंबई क्राइम ब्रांच ने इस साइबर ठगी के नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए झारखंड और दिल्ली से छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह गिरोह देशभर में 3,000 से अधिक साइबर अपराधों से जुड़ा हो सकता है।

मुख्य आरोपी की पहचान

डीसीपी (साइबर) बजरंग बनसोडे ने जानकारी दी कि गिरोह का मुख्य आरोपी झारखंड का 28 वर्षीय आरिफ अंसारी है, जो पूर्व में भी साइबर अपराधों में शामिल रहा है। उसने दिल्ली निवासी साजिद अली के साथ मिलकर इस ठगी की योजना बनाई। साजिद ने कंप्यूटर एप्लीकेशन में मास्टर्स की पढ़ाई की है और यूट्यूब वीडियो देखकर APK फाइल बनाना सीखा। इस तकनीक को साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल करने के बाद, अन्य सदस्य लोगों के मोबाइल नंबर और व्यक्तिगत जानकारी इकट्ठा करने लगे।

ठगी की प्रक्रिया

सीनियर इंस्पेक्टर सुवर्णा शिंदे ने बताया कि जब कोई व्यक्ति APK फाइल पर क्लिक करता था, तो ठगों को उसके मोबाइल फोन और OTP तक पहुंच मिल जाती थी। इसके बाद, आरोपी सीधे बैंक खातों से पैसे निकाल लेते थे। गिरोह में मोहन महतो और सुनील सोरेन नामक दो युवकों को भी शामिल किया गया था, जो फोन कॉल के जरिए लोगों को धमकाते थे और उन्हें फाइल डाउनलोड करने या फॉर्म भरने के लिए मजबूर करते थे।

2.5 लाख रुपये की ठगी का मामला

पुलिस एक ऐसे मामले की जांच कर रही थी, जिसमें एक व्यक्ति ने फर्जी महानगर गैस बिल के लिंक पर क्लिक किया था, जिसके परिणामस्वरूप उसके खाते से लगभग 2.5 लाख रुपये उड़ाए गए। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि यह बिल पूरी तरह से फर्जी था और इसके पीछे इसी गिरोह का हाथ था। बंसोडे ने बताया कि राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज 3,000 से अधिक शिकायतों में इन आरोपियों की संलिप्तता उजागर हुई है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क की खोज में जुटी है।