झारखंड के गिरिडीह जिले में सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत

गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड स्थित थानसिंहडीह पंचायत के बड़की लतबेधवा गांव में एक आदिवासी परिवार की परेशानियां सरकारी योजनाओं की असलियत को उजागर कर रही हैं। गांव की निवासी पत्नी सोरेन ने बताया कि उनका खपरैल मकान कई वर्ष पहले गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। बारिश और जर्जर दीवारों के बीच रहना बेहद कठिन हो गया है, जिसके चलते उन्हें अपने पति और बच्चों के साथ गांव के एक विद्यालय के कमरे में आश्रय लेना पड़ा। परिवार के मुखिया मजदूरी करके किसी तरह घर का खर्च चलाते हैं, लेकिन उनकी आय इतनी नहीं है कि वे नया मकान बनवा सकें। सोरेन के अनुसार, उन्होंने कर्ज लेकर पुराने घर की मरम्मत भी करवाई थी, लेकिन बारिश के साथ ही छत फिर से टपकने लगती है, जिससे पक्के मकान का सपना अधूरा रह जाता है।

पशु शेड के नाम पर ठगी का आरोप

पत्नी सोरेन ने यह आरोप लगाया कि इसी दौरान एक व्यक्ति ने मनरेगा योजना के तहत उन्हें पशु शेड दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बदले उनसे 10 हजार रुपये भी लिए गए, लेकिन न तो पशु शेड मिला और न ही उनकी रकम वापस की गई। परिवार का कहना है कि आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने भरोसा करके पैसे दिए थे, लेकिन उन्हें केवल निराशा का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।