एनआईए ने हरियाणा के बलदेव नगर विस्फोट मामले में आरोपपत्र दाखिल किया
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जनवरी 2025 में हरियाणा के अंबाला जिले के बलदेव नगर पुलिस थाने में आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) से जुड़े कार विस्फोट की जांच के तहत पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी समेत आठ अभियुक्तों के खिलाफ आरोपपत्र प्रस्तुत किया है। यह वही शहजाद भट्टी है, जिसने रांची में संघ कार्यालय पर बम हमले की योजना बनाई थी।
16 जून को पेट्रोल बम से हुआ था हमला
रांची के निवारणपुर में स्थित आरएसएस कार्यालय पर 16 जून की रात पेट्रोल बम से हमला किया गया था। इस घटना में पुलिस ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया था, और इसमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) की संलिप्तता का आरोप लगाया गया है। सुरक्षा के दृष्टिगत एनआईए अब इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है।
एनआईए द्वारा जारी किए गए विवरण में बताया गया है कि शहजाद भट्टी ही नहीं, बल्कि अन्य आरोपियों पर भी गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम, 1967 [यूए(पी)ए], भारतीय दंड संहिता (बीएनएस), 2023, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 और दूरसंचार अधिनियम, 2023 की प्रासंगिक धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
आरोपपत्र में शहजाद भट्टी के अलावा करमजीत सिंह उर्फ टोनी, आकाश, सौरभ उर्फ सोबी, रमन कुमार, सत्यम, सुखदेव सिंह उर्फ सुखा और अमरजीत सिंह उर्फ अंबी के नाम भी शामिल हैं। एनआईए ने पंचकूला स्थित विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल करते हुए सभी आरोपियों की भूमिकाओं का विस्तार से वर्णन किया है।
आरोपपत्र के अनुसार, शहजाद भट्टी ने लोगों में भय फैलाने के उद्देश्य से पुलिस स्थलों को निशाना बनाते हुए बलदेव नगर पुलिस थाने पर हमले की योजना बनाई थी। एनआईए की जांच में पता चला है कि शहजाद भट्टी ने भारत में अपने ऑपरेशनल नेटवर्क स्थापित किए थे और स्थानीय सहयोगियों को हमले के लिए आवश्यक सामग्री जुटाने का कार्य सौंपा था। आकाश, भट्टी का प्रमुख सहयोगी था, जो साथियों के साथ हमलों का समन्वय करता था।
जांच में यह भी उजागर हुआ कि बलदेव नगर पुलिस थाने को निशाना बनाने के लिए संभावित लक्ष्यों की रेकी की गई थी। आरोपियों में से कुछ ने गैस सिलेंडरों और विस्फोटक सामग्री से भरी कार को पुलिस थाने के परिसर में खड़ा किया और घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया, ताकि इसे व्यापक रूप से फैलाया जा सके।
एनआईए की आगे की जांच में यह भी सामने आया कि शहजाद भट्टी ने सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों से आरोपियों की भर्ती की और उनका कट्टरपंथीकरण किया। डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक, दस्तावेजी और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर यह स्थापित हुआ कि सभी आरोपी हमले के दौरान लगातार अपने हैंडलर के संपर्क में थे।
