रांची: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में एक किशोरी के साथ हुई क्रूरता ने एक बार फिर मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क की भयावहता को उजागर किया है। लगभग छह साल पहले नाबालिग अवस्था में बहला-फुसलाकर दिल्ली ले जाई गई इस किशोरी को हाल ही में एक संयुक्त अभियान के तहत सुरक्षित मुक्त किया गया। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि आरोपियों ने किशोरी के आधार कार्ड में जन्मतिथि बदलकर उसे कागजों पर बालिग दिखाने की कोशिश की, ताकि वे मानव तस्करी और जबरन शादी जैसे अपराधों को छिपा सकें।
किशोरी को मुक्त कराने का यह अभियान चाईबासा पुलिस, दिल्ली पुलिस, मिशन मुक्ति फाउंडेशन और रेस्क्यू टीम द्वारा मिलकर चलाया गया। विभिन्न राज्यों की एजेंसियों के समन्वय से यह कार्रवाई सफल रही। अधिकारियों के अनुसार, झारखंड भवन के स्थानिक आयुक्त अरवा राजकमल के निर्देशन में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया गया, जिसके परिणामस्वरूप किशोरी को सुरक्षित रूप से मुक्त कराया जा सका।
काउंसलिंग में सामने आई दर्दनाक कहानी
रेस्क्यू के बाद काउंसलिंग के दौरान, किशोरी ने बताया कि उसे झारखंड से दिल्ली लाया गया, जहां उससे जबरन घरेलू काम कराया गया। इसके बाद उसे मुंबई भेजा गया और एक लाख रुपये में एक अज्ञात पंजाबी व्यक्ति को बेचकर उसकी जबरन शादी करा दी गई। इस दौरान उसने मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेली, और उसे अपनी मर्जी से कहीं जाने की अनुमति नहीं थी।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपियों ने किशोरी के आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि को बदलकर उसे दस्तावेजों में बालिग दर्शाया। पुलिस का मानना है कि इसी फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल कर उसे विभिन्न स्थानों पर भेजा गया और जबरन विवाह कराया गया। इस दस्तावेजी फर्जीवाड़े की भी गहन जांच की जा रही है।
गिरोह के कई सदस्य जांच के दायरे में
जांच में प्रतिमा गुप्ता (गुमला), हेमंत गुप्ता, विशाल गुप्ता, मनीष भारती और मीना देवी के नाम सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, दिल्ली के रोहिणी स्थित राम विहार इलाके में संचालित एक प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से किशोरी को विभिन्न स्थानों पर भेजा गया था। एजेंसी के नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पश्चिमी सिंहभूम के गुदड़ी थाना में मानव तस्करी, धोखाधड़ी और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह मामला केवल मानव तस्करी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा, बाल श्रम और जबरन विवाह जैसे गंभीर अपराध भी शामिल हैं।
झारखंड सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत किशोरी को कानूनी सहायता, काउंसलिंग और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में इस संगठित मानव तस्करी नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
