गिरिडीह में अनाथ बच्चों की सहायता के लिए उपायुक्त का कदम
गिरिडीह जिले के उपायुक्त रामनिवास यादव ने मानवता और संवेदनशील प्रशासन की एक मिसाल पेश करते हुए जिला परिषद क्षेत्र संख्या-31 डुमरी के ग्राम पारोगोड़ाटोली में पहुंचे अनाथ बच्चों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। इन बच्चों ने उपायुक्त को लिखा हुआ आवेदन दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि उनके पिता सोना मुर्मू का निधन फरवरी 2026 में और मां पुरनी हेंब्रम का निधन 11 जुलाई 2026 को हो गया। इस स्थिति के कारण ये सभी बच्चे बेसहारा हो गए हैं।
बच्चों की पारिवारिक स्थिति
आवेदन के अनुसार, परिवार की सबसे बड़ी बहन की उम्र लगभग 18 वर्ष है, जबकि अन्य भाई-बहनों की उम्र क्रमशः 16, 14, 14, 9 और 5 वर्ष है। बच्चों ने यह भी बताया कि उनकी दादी की उम्र लगभग 75 वर्ष है और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनकी पढ़ाई और पालन-पोषण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
उपायुक्त का आश्वासन
उपायुक्त रामनिवास यादव ने बच्चों से आत्मीयता से बातचीत की और उनकी समस्याओं को ध्यान से सुना। उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि बच्चों की शिक्षा किसी भी स्थिति में बाधित न हो। साथ ही, उन्होंने आवश्यक सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने, शिक्षा की उचित व्यवस्था करने और हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आदेश दिया।
स्थानीय लोगों की सराहना
उपायुक्त की इस संवेदनशील पहल से बच्चों और उनके परिजनों में नई उम्मीद जगी है। प्रशासन द्वारा बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने और उन्हें बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए उठाए गए कदम की स्थानीय लोगों ने भी प्रशंसा की है। यह कदम प्रशासन की जनसंवेदनशील कार्यशैली का सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है।
