किसलय शानू, रांची

विशेष जांच टीम (एसआईटी) की जांच में यह सामने आया है कि टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल), जिसकी पहले से ब्लैकलिस्टिंग की गई थी, को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित परीक्षाओं के संचालन का कार्य सौंपा गया था.

सीआईडी की रिपोर्ट के अनुसार, इस कंपनी का पता एफएफ, आदर्श कॉम्प्लेक्स, इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहा, जानकीपुरम, लखनऊ है. कंपनी को वर्ष 2025 में जेपीएससी द्वारा परीक्षाओं के संचालन का कार्य दिया गया था, और वर्तमान में भी यह कंपनी जेपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षाओं से संबंधित सभी प्रक्रियाओं का संचालन कर रही थी.

कंपनी को तीन वर्षों के लिए इंपैनलमेंट से डिबार किया गया था

सीआईडी की जांच में पाया गया कि टीडीपीएल को जेपीएससी द्वारा परीक्षा आयोजित करने का कार्य सौंपने से पूर्व झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में भी इसकी सेवाएं ली गई थीं. हालांकि, इस कंपनी की अनियमितताओं और लापरवाही के कारण जेएसएससी ने 20 मई 2025 को उसका कार्यादेश रद्द कर दिया और उसे अगले तीन वर्षों के लिए इंपैनलमेंट प्रक्रिया में शामिल होने से रोक दिया. इसके बावजूद, इस कंपनी को जेपीएससी जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में संवेदनशील कार्य का जिम्मा सौंपा गया.

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि ओपन सोर्स से जानकारी हासिल करने पर पता चला कि यह कंपनी उत्तर प्रदेश के कई संस्थानों में परीक्षा संचालन में भी शामिल रही है, जहाँ इसके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे. वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश एसटीएफ द्वारा कंपनी के निदेशक सत्यपाल सिंह और रामवीर सिंह को गिरफ्तार किया गया था.

इससे पहले, जेपीएससी में उप परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत श्वेता गुप्ता से भी कंपनी के संबंध में पूछताछ की गई थी. पूछताछ के दौरान, श्वेता गुप्ता ने कहा था कि यह कंपनी नॉमिनेशन के आधार पर कार्य करने के लिए चुनी गई थी. वर्तमान में, सीआईडी की टीम इसी संदर्भ में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष से साक्ष्य एकत्र करने का प्रयास कर रही है.

झारखंड: जेपीएससी घोटाला, ट्रांसफर के बावजूद श्वेता कुमारी परीक्षा नियंत्रक का कार्य करती रही हैं.