भोलू मंडल को झारखंड हाईकोर्ट से मिली राहत
धनबाद की बसंतीमाता कोलियरी के कर्मचारी भोलू मंडल को 39 साल पुराने 200 रुपये रिश्वत लेने के मामले में झारखंड उच्च न्यायालय से महत्वपूर्ण राहत मिली है। जस्टिस अरुण कुमार राय की पीठ ने भोलू मंडल की अपील को स्वीकार करते हुए उन्हें इस मामले से बरी कर दिया।
अदालत का निर्णय
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि भोलू मंडल ने रिश्वत की मांग की थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में केवल पैसे की बरामदगी या उसे स्वीकार करना दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए यह आवश्यक है कि रिश्वत मांगे जाने का आरोप संदेह से परे साबित किया जाए। इसी आधार पर वर्ष 2002 में धनबाद की सीबीआई विशेष अदालत द्वारा दिए गए दो वर्ष की सजा और 300 रुपये के जुर्माने के आदेश को निरस्त कर दिया गया।
सुनवाई में महत्वपूर्ण तथ्य
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता का बयान दर्ज नहीं हो सका, और गवाह भी अपने बयान से मुकर गए। यह स्थिति भोलू मंडल की अपील के पक्ष में महत्वपूर्ण साबित हुई। अदालत ने इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए अपना निर्णय सुनाया।
