झारखंड में अनुसूचित जाति बहुल गांवों के विकास के लिए केंद्र की नई योजना

रांची : केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति बहुल गांवों के समग्र विकास को प्रोत्साहन देने के लिए प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना के प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर दिया है। झारखंड सहित सभी राज्यों को डिजिटल निगरानी, गुणवत्तापूर्ण कार्य, समय पर धनराशि व्यय और उपयोगिता प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया गया है।

योजना का इतिहास और उद्देश्य

वर्ष 2021-22 से लागू की गई यह योजना, जो पूरी तरह से केंद्र द्वारा प्रायोजित है, के तहत देशभर में 15,387 अनुसूचित जाति बहुल गांवों को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जा चुका है। इस योजना के माध्यम से 2.5 लाख से अधिक लोगों को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, 785 छात्रावासों का निर्माण भी संपन्न हो चुका है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना के लिए 2,140 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

नई वित्तीय सहायता और डिजिटल प्रणाली

नई प्रस्तावित योजनाओं के अनुसार, 2,000 तक आबादी वाले गांवों को 30 लाख रुपये और इससे अधिक आबादी वाले गांवों को 50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही, मोबाइल आधारित डिजिटल सर्वे और ऑनलाइन मॉनिटरिंग व्यवस्था भी लागू की जा रही है।

बुनियादी सुविधाओं का विकास

झारखंड के अनुसूचित जाति बहुल गांवों में सड़क, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, कौशल विकास और स्वरोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास में इस योजना से नई गति मिल सकती है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का मुख्य लक्ष्य केवल धनराशि का व्यय नहीं, बल्कि निर्धारित विकास मानकों को गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरा करना है।