जामताड़ा सदर अस्पताल में गर्भवती महिला की मौत के बाद हंगामा

जामताड़ा सदर अस्पताल में एक गर्भवती महिला की मृत्यु के बाद से अस्पताल परिसर में भारी हंगामा और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। इस घटना के चलते भाजपा जिला अध्यक्ष समेत आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। 16 जुलाई को इलाज में लापरवाही के आरोप लगाते हुए परिजन और स्थानीय निवासी अस्पताल में जमकर हंगामे पर उतर आए थे। अस्पताल प्रशासन ने इस घटना के बाद सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अस्पताल में तैनात स्वास्थ्य कर्मचारियों के काम में रुकावट डालने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही, अस्पताल में भय का माहौल उत्पन्न होने की बातें भी की गई हैं।

स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

इस घटना के बाद स्वास्थ्य कर्मचारी सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक आवश्यक कदम नहीं उठाए जाएंगे, ऐसी घटनाएं पुनः हो सकती हैं। पूरे जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है।

तोड़फोड़ की घटना में मामला दर्ज

डॉ. दिनेश प्रसाद, जो अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक हैं, के लिखित आवेदन पर जामताड़ा थाना में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 132 के तहत सरकारी कार्य में बाधा डालने और तोड़फोड़ के आरोपों के तहत जांच शुरू कर दी है। प्राथमिक रिपोर्ट में भाजपा जिला अध्यक्ष सुमित शरण, जिला महामंत्री कमलेश मंडल, भाजपा युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष कुणाल सिंह, नगर अध्यक्ष प्रदीप रावत और अन्य भाजपा नेताओं को नामजद आरोपी बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, कई अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपित किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मरीजों को इलाज में कठिनाई

हड़ताल के कारण दूर-दराज के गांवों से आए कई मरीज बिना इलाज कराए लौटने को मजबूर हो गए हैं। मरीजों ने बताया कि वे लंबी दूरी तय करके और पैसे खर्च करके अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन हड़ताल के चलते उन्हें जरूरी चिकित्सकीय सुविधाएं नहीं मिल सकी। अस्पताल में बढ़ते तनाव को देखते हुए जामताड़ा पुलिस की टीम मौके पर तैनात कर दी गई है। प्रशासन स्वास्थ्य कर्मचारियों से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है, लेकिन कर्मचारी अपनी सुरक्षा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। इस परिस्थिति में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर संकट का सामना कर रही है।