झारखंड में मौसम का मिजाज बदलने की संभावना
रांची में सोमवार को मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कई हिस्सों में आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। इसके साथ ही, कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश, मेघ गर्जन और वज्रपात की स्थिति बन सकती है। विशेषकर दक्षिणी और मध्य झारखंड के जिलों में बारिश का प्रभाव अधिक हो सकता है। इस रुक-रुक कर होने वाली बारिश से उमस भरी गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है और तापमान में भी थोड़ी गिरावट आ सकती है।
28 और 29 जुलाई तक बारिश की संभावना
मौसम विभाग ने बताया है कि 28 और 29 जुलाई को भी राज्य में मौसम का यही रुख बना रहेगा। इन दिनों में कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ मेघ गर्जन की घटनाएं हो सकती हैं। इसके अलावा, हवाएं 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की संभावना है। पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, गुमला, खूंटी और लोहरदगा में कहीं-कहीं भारी बारिश की आशंका जताई गई है। 30 जुलाई को भी मौसम पूरी तरह साफ नहीं रहेगा, और आसमान में बादल छाए रहने के साथ ही कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। हालांकि, पिछले दिनों की तुलना में बारिश की तीव्रता कुछ कम रहने की उम्मीद है।
बंगाल की खाड़ी में बने डिप्रेशन का प्रभाव
मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे जुड़े ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट पर बने निम्न दबाव का क्षेत्र अब डिप्रेशन में बदल चुका है। इसी सिस्टम के चलते झारखंड में मानसून सक्रिय बना हुआ है, जिससे राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक की घटनाएं देखने को मिल रही हैं। अगले कुछ दिनों तक मौसम का यही मिजाज बने रहने की संभावना जताई गई है।
पिछले 24 घंटे में सिमडेगा में सबसे अधिक वर्षा
पिछले 24 घंटों में झारखंड में सिमडेगा जिले में सबसे अधिक 23.0 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। डाल्टनगंज में अधिकतम तापमान 33.4 डिग्री सेल्सियस जबकि लातेहार में न्यूनतम तापमान 21.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, कुछ स्थानों पर अधिकतम तापमान में 2.1 से 4.0 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि देखी गई है, जबकि अधिकांश क्षेत्रों में तापमान सामान्य के आसपास बना हुआ है।
मानसून में कमी और कृषि पर असर
हालांकि झारखंड में मानसून सक्रिय है, पिछले 56 दिनों में सामान्य से 29 प्रतिशत कम वर्षा हुई है, जिससे कई जिलों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। सिमडेगा (569 मिमी), साहिबगंज (499.4 मिमी), सरायकेला-खरसावां (427.6 मिमी), पश्चिमी सिंहभूम (427.2 मिमी) और पूर्वी सिंहभूम (385.9 मिमी) में सबसे अधिक वर्षा हुई है। वहीं, गढ़वा (140.7 मिमी), चतरा (149.2 मिमी), कोडरमा (191 मिमी), पलामू (200.4 मिमी) और देवघर (200.8 मिमी) में वर्षा की मात्रा कम दर्ज की गई है। कई जिलों में 40 से 60 प्रतिशत तक वर्षा की कमी के कारण कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
