झारखंड की महिलाओं की मेहनत से आम्रपाली आम की वैश्विक पहचान
झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं की कड़ी मेहनत के परिणामस्वरूप राज्य के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है। देवघर और गुमला जिले में उगाए गए ‘आम्रपाली’ आम अब दुबई के बाजारों तक पहुंच चुके हैं। हाल ही में दुबई के प्रसिद्ध लूलू मॉल में इस आम की पहली खेप पहुंच गई है, जहां इसकी बेहतरीन गुणवत्ता और मिठास के कारण इसे खरीदारों द्वारा काफी सराहा जा रहा है। इससे पहले, झारखंड के विभिन्न जिलों से आम्रपाली आम की खेप लंदन और इटली जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी भेजी जा चुकी है।
बिरसा हरित ग्राम योजना और जेएसएलपीएस का योगदान
इस सफलता के पीछे ‘बिरसा हरित ग्राम योजना’ और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) का महत्वपूर्ण योगदान है। जेएसएलपीएस के माध्यम से महिला किसानों के उत्पादक संगठनों द्वारा 2 टन आम्रपाली आम की पहली खेप दुबई भेजी गई है। यह संगठन लगातार ग्रामीण क्षेत्रों के स्वयं सहायता समूहों को आधुनिक मार्केटिंग और पैकेजिंग तकनीकों से जोड़ रहा है। इससे न केवल महिला किसानों की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि झारखंड के उत्पादों को भी वैश्विक पहचान मिल रही है। इन आमों को पहले ‘पलाश’ ब्रांड के तहत स्थानीय बाजारों में बेचा गया था, और वहां सफलता मिलने के बाद इन्हें विदेश भेजा गया।
सरकार की पहल और ग्रामीण महिलाओं का योगदान
झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त की है और इसका पूरा श्रेय राज्य की मेहनती महिलाओं को दिया है। उन्होंने कहा कि “बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत विकसित बागान आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का एक सशक्त माध्यम बन चुके हैं। दीदियों की मेहनत और जेएसएलपीएस के प्रभावी प्रबंधन का परिणाम है कि आज झारखंड का आम दुबई और यूरोप के बाजारों में पहुंच रहा है। सरकार का लक्ष्य महिला किसानों को वैश्विक बाजार के साथ जोड़कर उनकी आय में निरंतर वृद्धि करना है।”
