मधु कोड़ा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नई सुनवाई

पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के साथ जुड़े एक प्रमुख मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुंबई में करोड़ों रुपये की संपत्तियों को लेकर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ है। रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने इन संपत्तियों की प्रस्तावित ई-नीलामी पर अस्थायी रोक लगा दी है। अदालत का मानना है कि जिन संपत्तियों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) पहले ही मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत अटैच कर चुका है, उनकी नीलामी की अनुमति नहीं दी जा सकती।

विशेष पीएमएलए अदालत का आदेश

विशेष पीएमएलए न्यायाधीश योगेश कुमार ने 13 जुलाई को यह आदेश जारी किया। मामला 5 अगस्त 2026 को प्रस्तावित ई-नीलामी से संबंधित था, जिसे फीनिक्स एआरसी लिमिटेड और सी1 इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से आयोजित किया जाना था। अदालत ने इन कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे नीलामी की प्रक्रिया को आगे न बढ़ाएं।

संपत्तियों की सूची

यह मामला मुंबई में विभिन्न फ्लैट्स और व्यावसायिक संपत्तियों से संबंधित है। इसमें माटुंगा के बैबिलॉन अपार्टमेंट के 10 फ्लैट, मलाड के सेलेस्टिया हाइट्स में दो फ्लैट, गोरेगांव के विंडरमेयर अपार्टमेंट का एक फ्लैट और नरीमन प्वाइंट स्थित मित्तल टावर्स का एक व्यावसायिक कार्यालय शामिल हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन संपत्तियों की खरीद कथित मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित धन से की गई थी, जिसके कारण इन्हें वर्ष 2013 में अटैच किया गया था।

बैंक और संपत्तियों के अधिकार

ED ने अदालत को सूचित किया कि इन संपत्तियों को गिरवी रखने वाले बैंक के अधिकार बाद में फीनिक्स एआरसी लिमिटेड को सौंप दिए गए थे। फीनिक्स एआरसी ने 5 अगस्त को इन संपत्तियों की ई-नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। एजेंसी ने कहा कि यदि नीलामी हो जाती है, तो संपत्तियों पर तीसरे पक्ष का अधिकार बन जाएगा, जिससे पीएमएलए के तहत चल रही जब्ती और संपत्ति से जुड़े कानूनी अधिकारों पर प्रभाव पड़ेगा।

मनी लॉन्ड्रिंग का मामला

अदालत ने पहले ही इस दलील को गंभीरता से लिया। न्यायालय ने कहा कि जब कोई संपत्ति पीएमएलए के तहत अटैच है, तब उसकी बिक्री या नीलामी की अनुमति नहीं हो सकती। यदि किसी बैंक या वित्तीय संस्था का संपत्ति पर वैध दावा है, तो उसे पीएमएलए की प्रक्रिया के तहत विशेष अदालत में अपना दावा प्रस्तुत करना चाहिए।

भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच

यह मामला वर्ष 2009 में दर्ज भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ जांच शुरू हुई थी। ED ने आरोप लगाया कि कारोबारी मनोज पुनमिया और उनकी कंपनियों के माध्यम से कथित अवैध धन को विभिन्न कंपनियों और अचल संपत्तियों में निवेश कर वैध दिखाने की कोशिश की गई।

अगली सुनवाई का विवरण

अदालत ने दिल्ली और बॉम्बे हाईकोर्ट के पुराने फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि पीएमएलए के तहत अटैच संपत्तियों पर इस कानून का प्रभाव अन्य कानूनों पर प्राथमिकता रखता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संपत्तियों को सुरक्षित रखना आवश्यक है ताकि अंतिम सुनवाई के दौरान जब्ती, बहाली या अन्य आदेशों पर प्रभावी निर्णय लिया जा सके। अदालत ने फीनिक्स एआरसी लिमिटेड और ई-नीलामी कराने वाली कंपनी सी1 इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को किसी भी आगे की नीलामी प्रक्रिया को रोकने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।