झारखंड में कृषि व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री का निर्देश
झारखंड में इस वर्ष सामान्य से कम बारिश होने के कारण मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कृषि व्यवस्था को सुधारने के लिए अधिकारियों को विशेष तैयारी करने का आदेश दिया है। शुक्रवार को झारखंड मंत्रालय में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के विभिन्न प्रमंडलों की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग कार्ययोजनाएं तैयार की जानी चाहिए। पलामू प्रमंडल समेत उन जिलों पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया है, जहां हर साल कम बारिश के कारण सूखा जैसी स्थिति उत्पन्न होती है।
वैकल्पिक फसलों को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि ऐसे क्षेत्रों में किसानों को धान के बजाय कम पानी में उगने वाली दलहन और मोटे अनाजों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इसके साथ ही, जैविक खेती, व्यावसायिक खेती और जल संरक्षण आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया गया है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।
किसान पाठशालाओं और सौर सिंचाई पर ध्यान
बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य के प्रत्येक जिले में एक मॉडल किसान पाठशाला स्थापित करने की बात कही। वर्तमान में झारखंड में 57 किसान पाठशालाएं कार्यरत हैं, जहां किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने किसान समृद्धि योजना के तहत सौर ऊर्जा संचालित सिंचाई पंपों के वितरण में तेजी लाने पर जोर दिया, ताकि किसानों की सिंचाई लागत कम हो सके और खेती अधिक लाभकारी बने।
किसान संवाद और प्रगति की समीक्षा
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गढ़वा के भवनाथपुर स्थित किसान पाठशाला का जायजा लिया। उन्होंने दुमका के किसान सुरेश मरांडी से बातचीत की और कम पानी वाली फसलों के बारे में सलाह दी। वहीं, जामताड़ा के कृषि पदाधिकारी से काजू की खेती की प्रगति की जानकारी भी ली।
खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष बिजनेस मॉडल
मुख्यमंत्री ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने के लिए मुर्गी पालन, बकरी पालन, सूकर पालन और डेयरी को जोड़कर एक मजबूत व्यावसायिक मॉडल तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि किसानों को समय पर खाद, उन्नत बीज और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए लैंप्स (LAMPS) और पैक्स (PACS) को अधिक सक्रिय बनाने का आदेश दिया गया। इसके अतिरिक्त, कृषि उत्पादों की सीधी खरीद कर भुगतान तुरंत किसानों के बैंक खातों में करने पर भी जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि:
- राज्य के प्रत्येक जिले में मशरूम प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएं।
- सभी प्रमंडलों में प्रतिवर्ष कृषि व्यापार मेला और पशु मेला का आयोजन किया जाए।
- राज्य की बंजर और परती भूमि की पहचान कर वहां कृषि आधारित गतिविधियां शुरू करने के लिए कार्ययोजना बनाई जाए।
- गांवों और पंचायतों को कृषि के मॉडल के रूप में विकसित करते हुए नवीनतम कृषि तकनीकों का अधिकतम उपयोग किया जाए।
