जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले में शिक्षा विभाग को नई जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) और जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) मिल गई हैं। शुक्रवार को निशु कुमारी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी का पदभार ग्रहण किया, जबकि जूही रानी ने जिला शिक्षा अधीक्षक के रूप में कार्यभार संभाला। डीएसई का प्रभार आशीष पांडे ने जूही रानी को सौंपा, और डीईओ का प्रभार मनोज कुमार ने निशु कुमारी को हस्तांतरित किया। पदभार ग्रहण करने के पश्चात, दोनों अधिकारियों ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बैठक की, जिसमें कार्यालय की कार्यप्रणाली, लंबित मामलों और शिक्षा संबंधी योजनाओं पर चर्चा की गई।
उन्होंने सभी से मिलकर शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने का आग्रह किया। इसके पश्चात, डीएसई जूही रानी ने उपायुक्त से शिष्टाचार मुलाकात कर अपने योगदान की जानकारी साझा की। इस दौरान पूर्व डीएसई आशीष पांडे और पूर्व डीईओ मनोज कुमार भी उपस्थित रहे। नई पदाधिकारियों के कार्यभार ग्रहण करने से शिक्षा विभाग में नई कार्यशैली और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की उम्मीद की जा रही है। दोनों ने कहा कि वे शिक्षकों के साथ मिलकर स्कूली शिक्षा को नई ऊंचाई तक ले जाने की दिशा में कार्य करेंगे।
नई डीईओ (जिला शिक्षा पदाधिकारी) की पांच प्रमुख कार्य योजनाएं
- सभी स्कूलों में नियमित शैक्षणिक निरीक्षण कर शिक्षण व्यवस्था और परीक्षा परिणाम में सुधार लाना।
- स्कूल छोड़ चुके बच्चों की पहचान कर उनका पुनः नामांकन सुनिश्चित करना।
- शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, समय पर कक्षाओं का संचालन और शैक्षणिक प्रदर्शन की सतत निगरानी।
- मैट्रिक और इंटर के विद्यार्थियों के लिए विशेष कक्षाएं, मॉडल टेस्ट और शैक्षणिक सहायता कार्यक्रम चलाना।
- स्मार्ट क्लास, ई-लर्निंग सामग्री और तकनीक आधारित शिक्षण को सभी विद्यालयों तक पहुंचाना।
नई डीएसई (जिला शिक्षा अधीक्षक) की पांच प्रमुख कार्य योजनाएं
- प्रारंभिक कक्षाओं में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिए नियमित मॉनिटरिंग और विशेष अभियान चलाना।
- एमडीएम, छात्रवृत्ति, यूनिफॉर्म, पुस्तक वितरण और अन्य योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
- स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं, स्वच्छता और शैक्षणिक गतिविधियों की नियमित समीक्षा करना।
- नई शिक्षा नीति और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर शिक्षकों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण आयोजित करना।
- अभिभावकों, विद्यालय प्रबंधन समितियों (एसएमसी) और स्थानीय समुदाय के सहयोग से शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना।
