झारखंड हाईकोर्ट ने सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की याचिका पर दिया निर्देश
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने सरकार और आयोग का जवाब आने के बाद प्रार्थी को अपने पक्ष में दलील प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।
अभ्यर्थी द्वारा लगाए गए आरोप
याचिका में अभ्यर्थी राजेश प्रसाद ने आरोप लगाया है कि परीक्षा प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इसमें कट-ऑफ अंक जारी करने की प्रक्रिया, ओएमआर शीट अपलोड करने में गड़बड़ी, परीक्षा परिणाम पर सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर न होना और उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा के 418 अभ्यर्थियों के चयन पर सवाल उठाए गए हैं। प्रार्थी ने इन तथ्यों का हवाला देते हुए प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से परीक्षा कराने की मांग की है।
अमन साव एनकाउंटर मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई
रांची: गैंगस्टर अमन साव के एनकाउंटर मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई की। राज्य सरकार ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। सरकार ने बताया कि मामले में नए अनुसंधान पदाधिकारी (आईओ) की नियुक्ति की गई है, जिन्हें केस का अध्ययन करने के लिए समय चाहिए। अदालत ने अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की।
जांच से जुड़े दस्तावेजों की प्रस्तुति
इससे पहले, राज्य सरकार सीआईडी की केस डायरी, फोरेंसिक रिपोर्ट और जांच से जुड़े अन्य दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर चुकी है। पूर्व सुनवाई में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता हेमंत सिकरवार ने तर्क दिया था कि इस घटना में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थीं, लेकिन पुलिस ने केवल एक ही प्राथमिकी दर्ज की है। इसके अलावा, अमन साव की मां किरण देवी द्वारा ऑनलाइन दी गई शिकायत को अब तक औपचारिक एफआईआर के रूप में दर्ज नहीं किया गया है। किरण देवी ने एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग की है, जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है।
