परीक्षित महतो का गर्व और हकीकत
बोकारो के चंदनकियारी में, प्रसिद्ध संगीतकार परीक्षित महतो ने राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित होने पर गर्व जताया। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि केवल **सम्मान** मिलने से जीवन की जरूरतें पूरी नहीं होतीं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब फूस की छत बारिश का पानी नहीं रोक पाती, तो ऐसे सम्मान का क्या मूल्य।
सरकार की अनदेखी
परीक्षित महतो ने यह भी आरोप लगाया कि वर्षों तक कला के क्षेत्र में सेवा देने और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने के बावजूद, स्थानीय प्रशासन या सरकार ने उनकी स्थिति पर ध्यान नहीं दिया। उन्हें न तो कोई विशेष भत्ता प्राप्त हुआ और न ही किसी प्रकार की आर्थिक सहायता मिली। उन्होंने कहा कि व्यवस्था मंचों पर कलाकारों का सम्मान करती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि उन्हें अक्सर लावारिस स्थिति में छोड़ दिया जाता है। यह ध्यान देने योग्य है कि परीक्षित महतो झारखंड की सांस्कृतिक धरोहर के एक महत्वपूर्ण प्रतीक हैं।
